लफ़्ज़ों के बाहिर Or لفظوں کے باہر

सोचा कि तुम्हें कभी लफ़्ज़ों के बाहिर भी ला कर देखूँ, लफ़्ज़ों की भीतर, तुम बे-उम्र से हो गए हो जैसे। वक़्त का, मौसमों का, कोई असर दिखता ही नहीं तुम्हारे चहरे पर । क्या कोई टोना-तंतर है लफ़्ज़ों में ? न तुम्हारे बाल ही ज़्यादा सुफ़ैद हुए, न आँखों से शरारत गुम हुई – […]

बबलू की चूड़ियाँ OR ببلو کی چوڑیاں

1 जब भी मेरा मन भर जाता अपने जीवन की एक सी शैली देख कर, (जो के साल में कम-अज़-कम दो-तीन बार ज़रूर होता है), मैं पहुँच जाती अपने पसंदीदा नाई की दुकान, यानि कि सॅलोन में, और बालों को किसी नए स्टाइल में (ऐसा केवल मुझे लगता है) कटा आती । यह परम्परा मांने […]

लिखो Or لِكهـو

एक चिट्ठी उर्दू में एक ख़त हिन्दी में एक सलाम भइय्या को एक प्रणाम जीजी को एक दुआ भतीजे-भतीजियों के लिये एक आशीर्वाद भान्जे-भानजियों के लिये एक शाम मेरे दोस्तों के ख़यालों में एक सुबह उन बे-नाम से रिश्तों की बातों में एक चिट्ठी मैं लिखूँ और जवाब में तुम भी एक ख़त लिखना ایک […]

सीलन or سيلن

आज क़िताब के पन्ने उन्गलियों को नम लगे, शायद बीती शाम वह रोया होगा । उस की आँखों की नमी कैसे मीलों दूर आ जाती है कैसी अजीब-ओ-ग़रीब ताल-मेल है, उसकी आँखों का, मेरे शहर के आसमान से ! वह सोएगा तो शायद रात भी आ ही जाएगी । آج کتاب کے پنے انگلیوں کو […]

क़ीमत Or قيمت

अपनी यादों को एक ख़ूबसूरत सी रेशम की पोटली में बाँधा और बेच आई । क़ीमत भी ठीक ही मिल गई । सोना आज कल बाज़ार में ३०,०००/१० ग्राम के भाव चल रहा था । घर की छत टपक रही थी । माँ ने उसे शादी पर जो अँगूठी भेंट दी थी, वह उसे बेच […]

यादें Or یادیں

क्या करती है सारा दिन जो कभी थकती नहीं! निरन्तर चंचल, नई नई हरकतें करती हुई, यादें भी अजीब होती हैं । کیا کرتی ہیں سارا دن جو کبھی تھکتی نہیں نرنتر چنچل نئ نئ ہرکتیں کرتی ہئ یادیں بھی اجیب ہوتی ہیں

लाहौर or لاهـور

लाहौर एक शहर जिसके बारे में सिर्फ़ पढ़ा-सुना जिसकी गलियों की सिर्फ़ तस्वीरें देखीं फिर कैसा अजनबी सा रिश्ता है इस शहर से आज सुना इक दोस्त जाएगा फिर मुलाक़ात करेगा लाहौर की उन गलियों से यूँ लगा जैसे वो शहर बुला रहा है कहता है – आओ तुम भी मिलो मुझ से देखो अब […]

तनहा राहें Or تنہا راہیں

कब दिन छोटे थे और ज़िन्दगी बहुत लम्बी थी, शायद उन रास्तों पर चलते तुम साथ होते थे, हर शाम तराने गाती थी और सुबह गीत सुनाती थी, मुश्किलों में भी मुस्कुराने की वजहें मिल जाती थी, देखा आज फिर उन कच्चे रास्तों की तरफ़, सिर्फ़ तनहा सड़कें नज़र आईं کب دن چھوٹے تھے اور […]

Scribbles

گہرا سیاە رنگ ہلکا ہو جاتا ہے روز سُبە جب آتی ہے آسمان بھی بدل جاتا ہے روز وە شام لجاتی ہے سورج اِِمارتوں کے پیچھے چھِپ جاتا ہے روز وە چِڑِیا گاتی ہے تاروں کو نیند آ جاتی ہے اور رات چلتی جاتی ہے