चिट्ठी Or چٹّھی

बहुत दिन हुए तुम्हें देखे, तुम से मिले, कभी आवाज़ ही सुना दिया करते थे, सो अब वो भी नहीं, ख़ैरियत से हो? और तुम्हारे शहर की सड़कें, कुछ बड़ी सी, कुछ ख़ाली सी, कुछ भरी सी, रोज़ तुम्हें घर से दफ़्तर ले जातीं, दुरुस्त हैं? हर शाम उस घर वापिस भी ले आतीं, जिसे […]