Undoing

To forget before I can remember. To end before I can begin. साथ चलो, कुछ यादें जलानी हैं, पीली धूप का अम्बी में ज़ायक़ा, हरे रंग की ख़ुश्बू उस गार्डन की, सुर्ख़, डरे ख़ूं का रगों में दौड़े जाना, काली, ख़ाली आँखों का रातों को जागना, नीली सड़कों पर तेज़ रफ़्तार बातें… रंग तो वही […]

लफ़्ज़ों के बाहिर Or لفظوں کے باہر

सोचा कि तुम्हें कभी लफ़्ज़ों के बाहिर भी ला कर देखूँ, लफ़्ज़ों की भीतर, तुम बे-उम्र से हो गए हो जैसे। वक़्त का, मौसमों का, कोई असर दिखता ही नहीं तुम्हारे चहरे पर । क्या कोई टोना-तंतर है लफ़्ज़ों में ? न तुम्हारे बाल ही ज़्यादा सुफ़ैद हुए, न आँखों से शरारत गुम हुई – […]

ख्वाबों में Or خوابوں میں

A couple of days back, I read Sad Tonight my friend Apoorva Mathur wrote. I believe the rhythm and effect of it stayed on with me and the next day, I found myself writing this: रात आधी, पूरी खाली सड़क अब भी पड़ी है, ख्वाबों में तुम्हारे मिलने के पहले ही तक़दीर तुम से जुड़ी […]

बबलू की चूड़ियाँ OR ببلو کی چوڑیاں

1 जब भी मेरा मन भर जाता अपने जीवन की एक सी शैली देख कर, (जो के साल में कम-अज़-कम दो-तीन बार ज़रूर होता है), मैं पहुँच जाती अपने पसंदीदा नाई की दुकान, यानि कि सॅलोन में, और बालों को किसी नए स्टाइल में (ऐसा केवल मुझे लगता है) कटा आती । यह परम्परा मांने […]

लिखो Or لِكهـو

एक चिट्ठी उर्दू में एक ख़त हिन्दी में एक सलाम भइय्या को एक प्रणाम जीजी को एक दुआ भतीजे-भतीजियों के लिये एक आशीर्वाद भान्जे-भानजियों के लिये एक शाम मेरे दोस्तों के ख़यालों में एक सुबह उन बे-नाम से रिश्तों की बातों में एक चिट्ठी मैं लिखूँ और जवाब में तुम भी एक ख़त लिखना ایک […]

सीलन or سيلن

आज क़िताब के पन्ने उन्गलियों को नम लगे, शायद बीती शाम वह रोया होगा । उस की आँखों की नमी कैसे मीलों दूर आ जाती है कैसी अजीब-ओ-ग़रीब ताल-मेल है, उसकी आँखों का, मेरे शहर के आसमान से ! वह सोएगा तो शायद रात भी आ ही जाएगी । آج کتاب کے پنے انگلیوں کو […]

क़ीमत Or قيمت

अपनी यादों को एक ख़ूबसूरत सी रेशम की पोटली में बाँधा और बेच आई । क़ीमत भी ठीक ही मिल गई । सोना आज कल बाज़ार में ३०,०००/१० ग्राम के भाव चल रहा था । घर की छत टपक रही थी । माँ ने उसे शादी पर जो अँगूठी भेंट दी थी, वह उसे बेच […]

यादें Or یادیں

क्या करती है सारा दिन जो कभी थकती नहीं! निरन्तर चंचल, नई नई हरकतें करती हुई, यादें भी अजीब होती हैं । کیا کرتی ہیں سارا دن جو کبھی تھکتی نہیں نرنتر چنچل نئ نئ ہرکتیں کرتی ہئ یادیں بھی اجیب ہوتی ہیں

काजल Or كاجل

आज फिर एक अरसे के बाद तुम्हारी आवाज़ पड़ी कानों में कल आँखें ढूँढ रही थी तुम्हें – काजल जो लगाया था, तुम कहा करते थे न, और गहरा, और सियाह लगाओ काजल – कल अपनी आँखों में तुम्हें देखा, और आज तुम्हारी आवाज़ में ख़ुद को ढूँढा । آج پھر ایک ارسے کے باد […]